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Author meenajain.com



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      श्रीमती मीना जैन एक लेखिका, कवयित्री के साथ-साथ वेब डिजाइनर, मास्टर इन सोशल वर्क (M.S.W), सहायक प्रोफेसर (S.E.T.) की डिग्रियां भी हासिल है।
    बचपनसे ही कुछ करने की चाहत ने मीना जी को कभी रूकने नहीं दिया। जैसी भी परिस्थितीयां बन पड़ी उसी में से मार्ग निकाल कर हर बार नवसृजन किया। पूरानी असमानता की सोच की बेड़ियों को काटना मीना जी ने अपने घर से ही शुरू किया। लड़कियां पढ़-लिखकर क्या करेगी, चूल्हा ही फूंकेंगी की सोच को काटते हुए चूल्हे के साथ अपने कौशल का विकास और उसका इस्तेमाल किया। सेट परीक्षा प्रथम प्रयास में ही उत्तिर्ण कर अपने पिताजी को गौरवान्वित किया।
       मीना जी अपने परिवार के सभी का शुक्रिया करती है की, हर बार परिवार ने उनका साथ दिया तभी ये सब कुछ हासिल है। आज परिवार को उनपर गर्व महसूस होता है, जिसके लिए मीना जी सह्रदय आभार प्रकट करती है। इससे वे समाज में एक उदाहरण भी प्रस्तूत करना चाहती है की, परिवार और अपनों का आशीर्वाद साथ होना ही सफलता की प्रथम सिढी होती है, उसके बाद सफलता की कहानियां तो अपने कार्य अपने-आप बयां कर देते हैं।
      मीनाजी ने अपने स्कूली शिक्षा के द्वितीय कक्षासे ही वक्तृत्व कला-कौशल को परखना शुरू कर दिया था। उसके बाद कई धार्मिक-सामाजिक मंचों पर अपने विचार-वक्तृत्व को प्रकट करते हुए मिडीया ग्रुप के तहत बड़ा मंच उपलब्ध हुआ और 2016 में समाज के क्रियाशील समाजसेवीओं को सम्मानित करने का ईवेंट-प्रभार प्राप्त हुआ, साथ-साथ सहसंपादक का कार्य भी किया।
      मीना जी ने शिक्षा के १५ साल अवकाश के बाद भी MSW (A+) डिग्री हासिल कर पढ़ाई करने की कोई उम्र सीमा तय नहीं होती ये साबित कर दिखाया। अब भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने knowledge की सीमाओं को और विस्तार रही है|
      स्त्री-पुरुष समान लिंगभाव की नई संकल्पना पर शोधकार्य (Research) कर सामाजिक बदलाव को संशोधित किया।
      'घुटन (आजादी बक्क्ष दे)'  ईस अपने सहसाथी प्रोफेसर संकलित किताब में अपने कविताओं को प्रस्तूत किया। तथा कई न्यूज़ पेपर में वक्त-वक्त पर सामाजिक विषयों पर कविता, लेख प्रकाशित कर सामाजिक विवेचनाओं को प्रस्तूत कीया।
      ज्योतिष संबंधित ज्ञान हो या जैन धर्म का सूक्ष्म अध्ययन हो, सबको ग्रहण कर जैसे अपने-आप को वह ज्ञान के प्रति समर्पित समझती है। ज्ञान के बिना कुछ भी नहीं ये कहते हुए आजकी अति वर्च्यूआलीटी से सिमीत रहने का सबको विनम्र परामर्श देती है।
     अपने विचार, लेखन, शायरी, शब्दों द्वारा समाज को खुशीयों का खजाना बांटने के छोटे-से प्रयास में मीना जी ने meenajain.com वेबसाईट डेवलप कर सभी को खुशहाल कैसे रहना है के लिए प्रेरित करती है, समाजकार्य को हिन्दी भाषा मे अनुवादित कर भारत के ज्यादा से ज्यादा  BSWMSWSET-NET अभ्यर्थी इसका फ्री में  लाभ उठा सके यही meenajain.com का उद्देश्य है ...! Life के हर पड़ाव पर दोस्तों ने दिए साथ और उनकी प्रेरणा का मीना जी तहेदीलसे शुक्रिया अदा करती है| 


"आसमान कितना भी बाकी क्यों न हो, 
हर पल बस चलते ही रहना है .....।"

ऐसा मानते हुए मीनाजी अपने प्रयासों को
कभी विराम नहीं देगी, ऐसा वो कहती हैं।

- साभार, शुक्रिया ....।

मीना जी के कुछ बेहतरीन Published Articles....











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