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मंगलवार, 15 जून 2021

MSW-7 Principles of Social Work-B

7 Principles of Social Work-Part-B
7 Principles of Social Work/ 

MSW (master of social work)

7 Principles of Social Work/ 

७ समाजकार्य के सिद्धांत :- (part-B)


 (3) गोपनीयता का सिद्धांत/

Principle of Secercy :-

       सामाजिक कार्य व्यवसाय में सामाजिक कार्यकर्ता को Client को सूचना का प्राथमिक स्रोत मानना ​​चाहिए और Client से अधिक से अधिक जानकारी इकठा करनी चाहिए। Client से उपलब्ध जानकारी को केवल उसके साथ काम करने वाले व्यक्ति, संगठन आदि के लिए गोपनीय रखा जाना चाहिए।

       किसी भी व्यवसाय में, गोपनीयता बनाए रखना एक व्यावसायिक रणनीति है। जब सामाजिक कार्यकर्ता और Client के बीच एक अच्छा समायोजन संबंध स्थापित होता है, तो व्यक्ति का विश्वास मजबूत होता है और वह कार्यकर्ता को अपने जीवन के कई रहस्य बताता है। जो वो अक्सर किसी को नहीं बताता। या ऐसा करना उसके व्यक्तित्व को खतरे में डाल सकता है। इसलिए वह इस राज को केवल कार्यकर्ता के साथ साझा करता है।अगर कार्यकर्ता उसे प्रकट करेंगा तो Client के जीवन की शांति नष्ट हो जाएगी। ईसिलीए सेवार्थी ने बताई गई जानकारी गोपनीय रखी जाती है। अगर एसी कोई बात हो, जिससे कि सेवार्थी की समस्या का समाधान करने के लिए उसे किसी अन्य विशेषज्ञ से सलाह refer करना जरूरी लगे तो उस बात के बारे में क्लायंट से समक्ष रूप से सब स्पष्ट कर अर्थात क्लायंट की अनुमति से बातें साझा करनी चाहिए।

समाजकार्य कर्ता की भूमिका:-

 (1)क्लायंट बड़े भरोसे से संस्था से जुडकर समाधान चाहता होता है, उसका भरोसा कायम रखने के लिए उसके द्वारा दी गई जानकारी गोपनीय रखना।

(2)अपने क्लायंट की बदनामी ना होने देना, इसलिए गोपनीयता का सिद्धांत अपनाया जाता है। समाजकार्य व्यक्ती को कलंकित नहीं मानता।

(3) एक व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत सूचनाओं को तब-तक साझा नहीं करता  जब तक उसे कार्यकर्ता पर विश्वास न हो, जिसके लिए समाज कार्यकर्ता को गोपनीयता सिद्धांत अपनाना जरूरी है। 

सामाजिक प्रतिष्ठा, पारिवारिक शांतता, और वैयक्तिक सम्मान के मूलभूत हक्क को अबाधित रखने में यह गोपनीयता का सिद्धांत महत्व का कार्य निभाता है।


(4) आत्मनिर्णय का सिद्धांत/

Principles of self-determination

     व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व विकास के लिए स्वयं निर्णय लेने में सक्षम होने की आवश्यकता होती है। सोशलवर्क service मे समस्याग्रस्त व्यक्ति को अपने निर्णय लेने के लिए सशक्त किया जाता है। उसे अपनी जिम्मेदारियों से अवगत कराया जाता है।

      सामाजिक कार्यकर्ता ने अपने क्लायंट को स्वतंत्र और सामान्य तरीके से सोचने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्हें अपने समस्या जड़ित मुद्दे और स्थिति पर विचार करके निर्णय लेने के लिए तैयार करना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता ने अपने क्लायंट को मुद्दों से संबंधित उपकरणों से अवगत कराना चाहिए। ताकि वह सक्षम होकर सही तरीके से और जल्द  गति से स्वयं निर्णय प्रक्रिया मे प्रगति कर सके।

     समाज कार्य का यह सिद्धांत सेवार्थी के आत्म निर्णय के अधिकार पर बल देता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने लिए सर्वोत्तम का चयन करने का अधिकार होता है। इस दिशा में यह सिद्धांत हमें मार्गदर्शन करता है।

समाज कार्य के इस सिद्धांत का यह कहना है कि कार्यकर्ता सेवार्थी को समस्या समाधान के प्रत्येक पद पर आत्म निर्णय का अधिकार देता है। तथा कभी भी अपने निर्णय को उसके ऊपर आरोपित करने की कोशिश नहीं करता। उसे अपने निर्णय लेने के बारे में पूर्णता: स्वतंत्र अधिकार देता है ।

सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका -

(1) एक पेशेवर, उत्कृष्ट सामाजिक कार्यकर्ता एसा सहयोग कर्ता होता है, जो किसी समस्या वाले व्यक्ति को उसकी समस्या को हल करने और उसकी गंभीरता को कम करने में मदद करता है,  लेकिन इसका मतलब यह कि सामाजिक कार्यकर्ता क्लायंट के जीवन के सारे निर्णय स्वयं ले। क्लायंट में निर्णय लेने की क्षमता होती है। उसके ऊपर लोगों का बंधन हो सकता है, उसका उत्पीड़न हो रहा हो सकता होगा, उसकी सोचने की क्षमता, उसका जुनून, उसकी कार्यक्षमत, सभी चीजों पर विचार करना होता है।

(2) क्लायंट पर निर्णय थोपने के बजाय, सामाजिक कार्यकर्ता से अपेक्षा की जाती है कि वह क्लायंट को अपनी समस्या को हल करने और समाधान पाने के लिए प्रोत्साहित करे।

(3) समाज कार्यकर्ता इस सिद्धांत को मानते हुए सेवार्थी को निर्णय लेने की शक्ति को मजबूत करने में सहयोग करता है। विविध संसाधन के बारे में उसे ज्ञात कराता है जिससे वह अपने समस्या के बारे में उचित निर्णय ले सके।

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